सिमडेगा उपायुक्त की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन प्राधिकार समिति की बैठक हुई संपन्न

सिमडेगा:- उपायुक्त सिमडेगा आर. रॉनीटा की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन प्राधिकार समिति की समीक्षा बैठक का आयोजन हुआ। उपायुक्त ने आपदा प्रबंधन प्राधिकार की पिछले बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में अनुपालन कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने आपदा के तहत नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत व्यवस्था दुरुस्त किए जाने हेतु आवश्यक तैयारियों की जानकारी ली। सीसीटीवी कैमरा लगाने की दिशा में आवश्यक चर्चा की गई। साथ ही जिले में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने सड़क दुर्घटना, अतिवृष्टि से फसल क्षति, कुंआ, नदी, जलाशय एवं आपदा के तहत मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मुआवजा भुगतान एवं आश्रितों द्वारा प्राप्त आवेदनों की स्वीकृति की समीक्षा करते हुए ससमय निष्पादन करने का निर्देश दिया। साथ ही हाथी के प्रभाव से संबंधित दुर्घटना की भी समीक्षा की। ड्रिंकिंग एंड ड्राइविंग से संबंधित मामले की जानकारी ली। इसके अलावे अन्य महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा कुल्लू, अपर समाहर्ता, श्री अमरेन्द्र कुमार सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी श्री महेंद्र कुमार, सिविल सर्जन डॉ. पीके सिंहा, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं अन्य उपस्थित थे




सिमडेगा विधायक की दी मद की राशि से विभागीय इंजीनियर के द्वारा कराया जा रहा है मनमानी कार्य

सिमडेगा विधायक जिस उद्देश्य से क्षेत्र के विकास के लिए अपने निधि के माध्यम से जन कल्याणकारी के लिए राशि खर्च कर रहे हैं लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही दिख रही है उनके दी गई मद की राशि से बनाने वाले लोग एवं विभागीय कर्मी के द्वारा जिस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है इससे आने वाले दिनों में साफ तौर पर लोगों को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। विधायक भूषण बाड़ा के मदद से 300 फीट की पीसीसी पथ पाकरटांड प्रखंड के किनबीरा गंझूटोली में निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है जहां पर पूर्व से जिस सड़क पर grade-1 की सड़क थी उसे जेसीबी के माध्यम से खुदाई करते हुए उस से निकले हुए मेटल को ही लगा दिया जा रहा है। जबकि प्राक्कलन में इस पर ईट की सोलिंग लिखी हुई थी ।अब ऐसे में प्राक्कलन के विपरीत कार्य करना कहीं न कहीं समझ से परे है। क्योंकि 300 फीट की इस पीसीसी पथ निर्माण कार्य से लोगों की बहुत उम्मीद जुड़ी है और यहां पर ईट सोलिंग के बाद ही काम होना है ऐसे में एस्टीमेट वाला जो भी ईट के पैसे हैं उसे बचाकर विभाग के इंजीनियर के द्वारा वहीं से निकालकर मेटल इस्तेमाल किया जा रहा है ।सिमडेगा विधायक को इस मामले में संज्ञान लेने की आवश्यकता है ताकि उनके मद की राशि का सदुपयोग हो सके इधर प्रखंड सांसद प्रतिनिधि दीप नारायण दास ने भी निर्माण कार्य पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि इस प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी क्षेत्र की जनता के लिए आई हुई मद की राशि का विभाग के इंजीनियर के द्वारा जिस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है इससे निश्चित ही जांच कराते हुए कार्रवाई होनी चाहिए।




बननी थी कहीं, बना दी कहीं अब ग्रामीण कर रहे हैं निर्माण का विरोध

कोलेबिरा:-सुनने में भले थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन है यह सच।डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुबर्न मिशन योजना के अंतर्गत फेवर ब्लॉक निर्माण में एक बड़ी लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है। ग्रामीणों ने जिस सड़क के निर्माण की स्वीकृति कराई थी, विभाग ने उस पर काम शुरू न करकर दूसरी जगह पर निर्माण कार्य शुरू कर डाला। जबकि, कागजों से लेकर शिलान्यास बोर्ड तक में उसी स्वीकृत फेवर ब्लॉक निर्माण कार्य का नाम लिखा हुआ है।

क्या है मामला

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन अन्तर्गत कोलेबिरा प्रखंड के एडेगा भंडार टोली में फेबरब्लॉक का निर्माण होना था। शिलापट्ट में भी भंडार टोली में फेबरब्लॉक निर्माण लिखा गया है। लेकिन अब गांव के लोग नाराज हैं, गांव के ज्योतिष लुगुन, लोधा लोहरा, रामदेव, भूषण, सुगड़, आनंद कलिंद्र, संतु, जॉन, मनोज और बीरेंद्र सहित कई लोगों ने अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों पर आरोप लगाया है और योजना में गड़बड़ी का आशंका जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त योजना को एडेगा भंडार टोली में ना बनाकर अधिकारियों ने एडेगा पाहन टोली में बनवाया है। जिसका अब विरोध हो रहा




इस गांव में सिर्फ फोटो खिंचवाने आते हैं जनप्रतिनिधि और अधिकारी,खेत के चुआ से पानी पीने पर मजबूर लोग

जलडेगा: प्रखंड मुख्यालय से लगभग 8 किमी दूर सावनाजारा गंझू टोली के ग्रामीण कई वर्षों से पानी के लिए एक खेत में बने चुआं पर ही निर्भर हैं। पानी की समस्या से जूझते लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नाराज भी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी समस्याएं कभी मुद्दा नहीं बनती हैं। लोग बताते हैं कि सालों पहले शुरू में यह चुआं इतना गहरा नहीं हुआ करता था। बाद में उसका जलस्तर कम होने पर लोगों द्वारा खुदाई करते-करते अब इसकी गहराई लगभग 8 फीट तक पहुंच गई है। ग्रामीणों की मानें तो टोली के 8-10 परिवार खेत में बने चुआं का गंदा पानी पीने को मजबुर हैं। लोग बताते हैं कि पानी की समस्या को लेकर उनकी सुध लेने की जहमत न तो प्रशासन ने की और न ही अभी तक किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं उठाई है। जिसके कारण ग्रामीण अब किसी से उम्मीद नहीं रखते हैं। अब तो पानी के लिए चुआं के भरोसे रहना ही उनकी नियति बन गई है।गांव की महिला अमृता देवी, सरस्वती देवी, लखमी देवी, जानकी देवी, बासमोतो देवी सहित कई महिलाओं का आरोप है कि उनका गांव को आदर्श गांव का दर्जा देकर जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशाशन तक सिर्फ उनके गांव जाकर फोटो खिंचवाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में जब भी कोई बड़े लोगों का आगमन होता है तो उनकी उम्मीद जाग जाती है, लेकिन आज भी ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला जो ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का भरोसा दिला सके। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने समस्या के समाधान के लिए प्रयास नहीं किया। गांव की महिलाओं ने कहा की उनके द्वारा पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय और यहां तक कि उपायुक्त के जनता दरबार में भी लिखित आवेदन दिया जा चुका है लेकिन फिर भी आज तक पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।